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Sunday, December 5, 2010

सावधान कोई सुन रहा है


सावधान! कोई सुन रहा है ?
अब कुछ भी व्यक्तिगत नहीं रहा। कभी सुनते थे कि फोन और इंटरनैट के जरिये अपने किसी प्रिय से की गई बातें सिर्फ दो लोगों के बीच तक ही सीमित रहती है लेकिन हाल में हुई कुछ घटनाओं से तो साफ हो गया है कि अब व्यक्तिगत कुछ भी नहीं रह गया है बल्कि सब सार्वजिनिक हो गया है। अब फोन पर बात करते समय या फिर इंटरनैट पर चैट करते समय आप सावधान हो जाएं क्योंकि हो सकता है कि आप और उनके बीच कोई तीसरा सेंधमारी कर चुका हो। हाल में सबसे बड़ी घटना सामने आई है रतन टाटा और नीरा राडिया के बीच हुई बातों के टेप का सार्वजनिक होने की। मामला हालांकि कोर्ट में है और सभी को इंतजार है कुछ दिन बाद मिलने वाले जवाब का। सवाल ये नहीं कि इन खबरों को चटकारे लेकर पढ़ा जाए बल्कि सवाल ये है कि अब एक व्यक्ति का व्यक्तिगत जीवन भी असुरक्षित हो गया है। अब दोस्तों संग की गई बातें और अंतरंग संबंधों की जानकारी भी सार्वजनिक होना शुरू हो गई हैं। इन खबरों को पढ़कर एक आम की समझ में ये तो आ गया होगा कि उसकी बातों को भी किसी न किसी के द्वारा सुना जा रहा होगा। हैरानी कि बात ये है कि आखिर इन सब मामलों में दिलचस्पी लेने की बजाए इसका प्रयोग देश खुफिया तंत्र को मज़बूत करने में क्यों नहीं किया जाता। क्यों किसी की पर्सनल लाइफ को ही दुनिया के सामने लाकर शर्मसार करने की कोशिश की जाती है। क्या अब ये मान लिया जाए कि आने वाले समय में कोई भी बड़ा बिज़मैन अब फोन पर खुलकर सौदेबाजी और अपने हम मित्रों संग बातें करने से हिचकेगा। हर पल उसे यही ख़तरा बना रहेगा कि कहीं ऐसा तो नहीं कोई उसे सुन रहा हो। आखिर ये समाज का कौन सा चेहरा सामने आ रहा है। सबसे चौंकाने वाली ख़बर रही सीबीआई की साइट को हैक किये जाने की। सबके मन में बस एक ही सवाल बार-बार कौंध रहा है कि जब देश की सबसे सुरक्षति कही जाने वाली सीबीआई की साइट ही हैक हो गई तो फिर एक आम इंसान कितना सुरक्षित होगा। इन सब बातों को सोचकर तो इतना ही लगता है कि अब कुछ भी व्यक्तिगत नहीं रहा। सावधान रहो, सचेत रहो और सोच समझकर बोलो। फोन का और वेबसाइट का इस्तेमाल ज़रा सोच समझकर करो, कहीं ऐसा न हो कोई आपको सुन रहा हो या आपके द्वारा किया गया ई-मेल पढ़ रहा हो।

4 comments:

  1. bahut sahi kah rahe hain aap. aur haan thanks 4 being my blog follwer.

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  2. thanks,
    within 3 days you can read crucial story of this going year.

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  3. श्री अखिलेश कृष्ण मोहनजी इस दुनिया में कुछ भी निरापद नहीं है। कुछ भी अन्तिम नहीं है।

    यदि तकनीक आयेगी तो सुविधा के साथ-साथ असुविधा तो होगी ही।

    जहाँ तक वैयक्तिक निजता का सवाल है, तो इस विषय में कानून काफी सुस्पष्ट है। हमें देश की सबसे बडी अदालत के निर्णय का इन्तजार करना होगा।

    फिर भी इन टैप से देश को नुकसान कम, लाभ अधिक हुआ है। बडे-बडे चेहरों की नकाब हट गयी। आम व्यक्ति को खास लोगों की सच्चाई प्रमाणिक तौर पर ज्ञात हो गयी।

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