Powered By Blogger

Thursday, December 16, 2010

ऐसे बढ़ाएं याददाश्त...


रोजमर्रा की जिंदगी में तकनीक के बढ़ते दखल ने हमें बेहद आरामतलब बना दिया है। मोबाइल फोन, इंटरनेट से जिंदगी आसान तो हुई है लेकिन इसके नुकसान भी हैं। कोई सूचना या रहस्य यदि एक क्लिक की दूरी पर हो, तो कोई क्यों अपने दिमाग को कष्ट देना चाहेगा। लेकिन आगे चलकर ये आदतें विशेष रूप से मस्तिष्क की याद रखने की क्षमता पर घातक असर डाल सकती हैं।

तो पेश है याददाश्त बढ़ाने के कुछ टिप्स। यदि इनका पालन किया जाए तो दिमाग पहले से ज्यादा तेज हो जाएगा।

1. करें ब्रेन एक्सरसाइज :

दिमाग का जितना ज्यादा इस्तेमाल करेंगे वह उतना ही तेज और सक्षम बनेगा। ब्रेन एक्सरसाइज इसी फंडे पर काम करती है। रोज का सामान्य काम जरा सा हटके किया जाए तो आपके दिमाग का हर वह हिस्सा सक्रिय होने लगेगा जिसका पहले इस्तेमाल ही नहीं किया जा रहा था। आंखें बंद करके कपड़े बदलना, कोई नया विषय या नया खेल सीखना। बिजली का स्विच आन करने जैसे काम के लिए सीधे हाथ के बजाय उलटे हाथ का प्रयोग करना जैसे तरीके अपनाकर दिमाग की बंद खिड़कियों को खोल सकते हैं।

2. आठ सेकेंड का ध्यान :

कोई बात तभी लंबे समय तक याद रहती है जब उस पर ध्यान दिया जाए। जो भी याद रखना है उसे गौर से पढ़े और आगे बढ़ने से पहले आठ सेकेंड तक ध्यान केंद्रित करें। फिर देखिए कोई भी चीज कैसे याद नहीं रहती।

3. सीखने का अपना तरीकापहचाने:

कोई भी चीज याद रखने या सीखने का हर किसी का अपना तरीका होता है। कुछ लोग बेहतर विजुअल लर्नर होते हैं। यह वे लोग होते हैं जो किसी चीज को देखकर या पढ़कर सीखते हैं। वहीं कुछ लोग बेहतर आडियो लर्नर होते हैं जो सुनकर सीखते हैं। आपके लिए कौन सा तरीका सुविधाजनक है इसे पहचाने और याद रखने के लिए उसी का इस्तेमाल करें।

4. करें इंद्रियों का ज्यादा इस्तेमाल:

चाहे आप विजुअल लर्नर ही क्यों न हो याद रखने के लिए बोल कर पढ़ें। कविता की तरह याद करने की कोशिश करेंगे तो और भी अच्छा होगा। जानकारी को किसी रंग, सुगंध, स्वाद से जोड़कर याद रखने की आदत डालें।

5. नई जानकारी को किसी पुरानी जानकारी से जोड़कर याद रखने का प्रयास करें।

6. व्यवस्थित तरीके से करे याद:

किसी भी जानकारी को शब्दों और चित्र के माध्यम से याद रखने का प्रयास करें। चार्ट, संक्षिप्त रूप में याद रखना भी मददगार साबित होगा।

ये आदतें भी होंगी मददगार

-कुछ अच्छी आदतें डालकर भी दिमाग को तेज रखा जा सकता है।

1. रोज व्यायाम करें : नियमित व्यायाम से मस्तिष्क को ज्यादा आक्सीजन मिलती है जिससे याददाश्त कम होने का खतरा भी घट जाता है। साथ ही कुछ ऐसे रासायन स्रावित होते हैं जो दिमाग की कोशिकाओं को नष्ट होने से बचाएंगे।

2. तनाव से बचें : तनाव दिमाग को एकाग्रचित नहीं होने देता। ज्यादा तनाव से हार्मोन कोर्टिसाल दिमाग के हिप्पोकैंपस को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।

3. पूरी नींद लें : अच्छी नींद लेने से दिमाग तरोताजा रहता है। नींद पूरी नहीं हो पाने से दिनभर थकावट रहती है और किसी काम में ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है।

4. धूम्रपान न करें : सिगरेट पीने से मस्तिष्क तक आक्सीजन पहुंचाने वाली धमनियां सिकुड़ने लगती है जिससे दिमाग कमजोर होने लगता है।

क्या खाएं

-फल, सब्जियों का पर्याप्त मात्रा में सेवन सेहत के साथ दिमाग के लिए भी काफी लाभकारी साबित होता है। विटामिन बी, बी 12, बी 6 फोलिक एसिड युक्त खाद्य पदार्थ जैसे पालक, हरी सब्जियां, स्ट्राबैरी, तरबूज-खरबूज जैसे रसीले फल, सोयाबीन से याददाश्त तेज होती है। ये नसों को क्षति पहुंचाने वाले होमोसिसटीन को नष्ट करते हैं। लाल रक्त कणिकाएं बनाने में मदद करते हैं जो मस्तिष्क तक आक्सीजन पहुंचाती हैं। टमाटर, ग्रीन टी, ब्रोकली और शकरकंद में विटामिन ई, सी और एंटीआक्सीडेंट पाए जाते हैं। ये शरीर और दिमाग में आक्सीजन का प्रवाह बढ़ाते हैं जिससे दिमाग की सक्रियता बढ़ती है। मछली, अखरोट और बादाम खाने से भी दिमाग तेज होता है।

खजुराहो के मंदिरों में नारी सौंदर्य


खजुराहो के मंदिरों में नारी सौंदर्य



विश्वविख्यात खजुराहो के मंदिर मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में है। खजुराहो खर्जुरवाहक का परिवर्तित रूप माना गया है। कनिंघम के अनुसार खर्जुर वाटिका से खजुवाटिका और फिर खजुराहो हो गया।

खजुराहो के मंदिर अपनी आकृति सौंदर्य के लिए ही नहीं, वरन् अपने जीवंत शिल्प के कारण विश्रुत है। बिना परकोटा के सभी मंदिर ऊंचे चबूतरे पर निर्मित है। बहुत-से मंदिरों में गर्भगृह के बाहर तथा दीवारों पर मूर्तियों की दो-तीन पंक्तियां है। इनमें मुख्य देवी-देवताओं की मूर्तियां, आलिंगनबद्ध युगल, नाग, शार्दूल और शाल-भंजिका तथा अनुपम नारी-सौंदर्य की प्रतिमाएं उत्कीर्ण है। दैनन्दिन मानवीय जीवन के उल्लास, पीड़ा-व्यथा, संगीत-गायन तथा नृत्य की मुद्राओं में ये पाषाण प्रतिमाएं तत्कालीन शिल्पियों के कला-कौशल की चिर स्मारक है। मुखर, मांसल, लावण्य की स्पन्दमयी चरम सीमाओं को मूर्त करते हुए खजुराहो के पाषाणी उभार दर्शकों की आंखों में घर कर लेते है।

पाषाण जैसे कठोर फलक पर उत्कीर्ण खजुराहो कला की जान अप्सराओं एवं सुर-सुन्दरियों की मूर्तियां, कोमल भावनाओं की अन्यतम् अभिव्यक्तियां है। सौंदर्य की जितनी भी मृदु-मधुर अभिव्यक्तियां हो सकती है, वह वैभिन्य एवं मोहकता के साथ पत्थर पर ढाल दी गई हैं। देवी-देवताओं, पशु-पक्षियों की अपेक्षा नारी-सौंदर्य का अंकन अनुपम एवं विलक्षण है। देवीय गुणों से युक्त नारी तथा उसकी सामाजिक स्थिति खजुराहो में अपने सुंदरतम रूप में अभिव्यक्ति हुई है। खजुराहो की नारी सर्वाग सुंदर है- बाहर से भी और भीतर से भी। वह सुशिक्षित है, नृत्य-संगीत की पंडिता है, चित्रकला प्रवीणा है, खेल-कूद में रुचि रखने वाली है। वह गेंद लिए अनेक स्थानों पर मूर्तित है। विभिन्न प्रकार से अपने जूड़ों को संवारते हुए, ललाट पर तिलक लगाते हुए, नेत्रों में अंजन लगाते हुए, अधरों पर लाली लगाते हुए और चरणों में मेंहदी रचाती हुई नारी-मूर्तियों को देखकर श्रृंगार प्रसाधन संबंधी रुचियों का पता लगता है। आभूषणों, पुष्प-मालाओं एवं पुष्पों से आभूषित नारी के अनेक रूप यहां उत्कीर्ण है।

घरेलू नारी का मूर्तिकरण भी यहां द्रष्टव्य है। जल भरते हुए, ईश्वर की आराधना करते हुए, पुत्र को प्यार करते हुए नारी के रूप मनोहर है। सद्य:स्नाता तथा केश प्रच्छालन करती नारी की मूर्ति अत्यन्त कमनीय है और दर्शक को अभिभूत कर देती है। मूर्तियों को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि खजुराहो की मध्यकालीन नारी वस्त्रों का उपयोग कम ही करती थी। कटि के नीचे धोती है पर सिर पर ओढ़नी नहीं। वक्ष पर कंचुकी है पर उत्तारीय नहीं। ऐसा लगता है- रूप सौंदर्य के प्रदर्शन में तत्कालीन नारी लज्जा का अनुभव नहीं करती थी।

नारी मूर्तियों के अंग-प्रत्यंग की रचना देखते ही बनती है। नारी के खड़े होने, चलने-फिरने सभी में एक विशेष सौंदर्य योजना है। उसके प्रत्येक हाव-भाव में कोमलता, क्रिया विदग्धता और कटाक्ष है। हाव-भाव की संरचना में कलाकार ने अंगुलियों एवं आंखों की क्रियाशीलता का विशेष ध्यान रखा है। यही बात वक्ष एवं पृष्ठभाग के विषय में भी कही जा सकती है। श्रोणि भाग को सामने लाने के लिए कहीं-कहीं शरीर में इतना मरोड़ लाया गया है कि स्वाभाविकता नष्ट हो गई है। अतिक्षीण, कोमल एवं लचीली कमर यौवन-भार को संभालने में असमर्थ-सी लगती है।

युग्मभाव को मूर्तित करने वाली नारी-मूर्तियां प्रेम और प्रसंग के व्यापार में पुरुष की तरह सचेष्ट एवं आनंदित प्रतीत होती है। वे यौवन के उत्ताल तरंगों पर दोलायमान है। खजुराहो का पुरुष लम्पट और व्यभिचारी नहीं। वह प्रेम और स्त्री-प्रसंग को पवित्र यज्ञ-सा समझता हुआ प्रतीत होता है। उसके पीछे एक धार्मिक भावना अन्तर्निहित-सी प्रतीत होती है।

कामिनी की कमनीय देह वल्लरी हर लोच और लचक को रेखांकित करती है मूर्तियां। स्त्री-चरणों के नुपूर, पायल, पैजनी तथा तोडल, मध्य भाग के कटिबंध मणि झालर तथा स्वर्णपट्टिका, वक्ष की दो लड़ी से सात लड़ तक की मणिमाला, वैजयंतीमाला, मोहनमाला, हार विदानी और बीजक पूरक, हाथों के स्वर्ण वलय, मणिकंठान, भुजबंध, गजरा, बधमुंहा, चूड़ा बंगरी तथा बबूल फली, बोहटा आदि माथे की बिंदिया, दामिनी, शीश फूल और सिर की पुष्पमाला, पुष्पमुकुट, जटामुकुट, मुक्तादाम तथा स्वर्ण श्रृंखलाओं का अंकन भी कुशलता के साथ किया गया है।

प्रिय-पत्र में लवलीन प्रोषित पतिका, पगतल में आलक्तक रमाती हुई कामिनी, नेत्रों को अंजन-शलाका का स्पर्श देती हुई सुलोचना, बालक को पयपान कराती स्नेह वत्सला जननी तथा पैर से कंटक मोचन करती विपगथा तथा नुपूर बांधती हुई नृत्योद्धत किन्नर बाला की विख्यात प्रतिमाएं अपनी जीवंत कला को समाहित कर रही है।

आभरण, अलंकार, आयुध और परिकर के अतिरिक्त खजुराहो की विशेषता तो इन प्रतिमाओं के आनन पर विभिन्न मनोभावों का ऐसा सजीव चित्रण है, जिसके आधार पर यह कहने का मन होता है कि यहां के कलाकारों ने स्थूल शरीर का निर्माण कर विराम नहीं लिया, वरन् उनमें प्राण-संचार भी किया है।

Sunday, December 5, 2010

सावधान कोई सुन रहा है


सावधान! कोई सुन रहा है ?
अब कुछ भी व्यक्तिगत नहीं रहा। कभी सुनते थे कि फोन और इंटरनैट के जरिये अपने किसी प्रिय से की गई बातें सिर्फ दो लोगों के बीच तक ही सीमित रहती है लेकिन हाल में हुई कुछ घटनाओं से तो साफ हो गया है कि अब व्यक्तिगत कुछ भी नहीं रह गया है बल्कि सब सार्वजिनिक हो गया है। अब फोन पर बात करते समय या फिर इंटरनैट पर चैट करते समय आप सावधान हो जाएं क्योंकि हो सकता है कि आप और उनके बीच कोई तीसरा सेंधमारी कर चुका हो। हाल में सबसे बड़ी घटना सामने आई है रतन टाटा और नीरा राडिया के बीच हुई बातों के टेप का सार्वजनिक होने की। मामला हालांकि कोर्ट में है और सभी को इंतजार है कुछ दिन बाद मिलने वाले जवाब का। सवाल ये नहीं कि इन खबरों को चटकारे लेकर पढ़ा जाए बल्कि सवाल ये है कि अब एक व्यक्ति का व्यक्तिगत जीवन भी असुरक्षित हो गया है। अब दोस्तों संग की गई बातें और अंतरंग संबंधों की जानकारी भी सार्वजनिक होना शुरू हो गई हैं। इन खबरों को पढ़कर एक आम की समझ में ये तो आ गया होगा कि उसकी बातों को भी किसी न किसी के द्वारा सुना जा रहा होगा। हैरानी कि बात ये है कि आखिर इन सब मामलों में दिलचस्पी लेने की बजाए इसका प्रयोग देश खुफिया तंत्र को मज़बूत करने में क्यों नहीं किया जाता। क्यों किसी की पर्सनल लाइफ को ही दुनिया के सामने लाकर शर्मसार करने की कोशिश की जाती है। क्या अब ये मान लिया जाए कि आने वाले समय में कोई भी बड़ा बिज़मैन अब फोन पर खुलकर सौदेबाजी और अपने हम मित्रों संग बातें करने से हिचकेगा। हर पल उसे यही ख़तरा बना रहेगा कि कहीं ऐसा तो नहीं कोई उसे सुन रहा हो। आखिर ये समाज का कौन सा चेहरा सामने आ रहा है। सबसे चौंकाने वाली ख़बर रही सीबीआई की साइट को हैक किये जाने की। सबके मन में बस एक ही सवाल बार-बार कौंध रहा है कि जब देश की सबसे सुरक्षति कही जाने वाली सीबीआई की साइट ही हैक हो गई तो फिर एक आम इंसान कितना सुरक्षित होगा। इन सब बातों को सोचकर तो इतना ही लगता है कि अब कुछ भी व्यक्तिगत नहीं रहा। सावधान रहो, सचेत रहो और सोच समझकर बोलो। फोन का और वेबसाइट का इस्तेमाल ज़रा सोच समझकर करो, कहीं ऐसा न हो कोई आपको सुन रहा हो या आपके द्वारा किया गया ई-मेल पढ़ रहा हो।